अर्थ शब्दों में नहीं तुम्हारे भीतर है । Meaning is not in the words but Inside You

अर्थ शब्दों में नहीं तुम्हारे भीतर है ।  Meaning is not in the words but Inside You

Thursday, January 29, 2015

सदस्यता

हर रोज अपनी बेशर्मी में नहाने के बाद भी
धुलती नहीं कायरता उनकी त्वचा से
उनकी ख्याति भी नहीं छुपा पाती उसकी गंध,
जानकर एक नजर पहचान जैसे पुरानी एक स्लाइड
उन्हें याद आया
बोल पड़ते वे प्रशंसा का कोई शब्द
देते कोई रसीदी भूल चूक लेनी देनी निमंत्रण,
लेखक प्रजाति की सदस्यता
अगली बार  बताइयेगा दिल्ली  आने से पहले
कहीं एक कार्यक्रम रख लेंगे,
इस बार भी मैं बिना बताये चला आया
यह जगह मेरा घर है
पर उनके लिए एक पता






© 23.6.2008

Sunday, January 25, 2015

अपनी कही बात /In Your Own Words

अपनी कही बात


उन्होंने कहा न जाओ दुनिया के छोर तक
डर जाओगे अपनी लम्बी परछाईं को देख,
उस पार पंखों वाले अजगरों की दुनिया है
उनकी उगलती आग से उजली धरती
जहाँ न रात है न दिन अगर तुम पहुँचे तो
राह देखते पत्थर में बदल जाओगे,
जैसे किसी और से सुनी हो यह
अपनी कही बात
जीवन में रिहर्सल की संभावना होती तो
लिख रखे हैं पटकथा में कुछ परिवर्तन,
टाल नहीं सकता अपनी कही बात
लौटना
जाना
तुमसे प्रेम करना,
न लिखे कई दिनों तक,
पर मैं भला न था
बुरे दिनों को जीते मैं बुरा होता रहा
मैं समय की तरह अगोचर हो गया
घड़ी में घूमता लगातार
अपनी ही कही किसी बात पे सनकाया सा


(इस छोर पर / वाणी प्रकाशन, वर्ष:2003)


In Your Own Words








They said: Don't go to the end of the Earth
because your lengthening shadow will frighten you.
There it is the world of winged pythons;
the earth there is ablaze with the fire they spit.
If you arrive where it is neither day nor night
you'll be turned into stone while you are waiting.
As if I had heard these words of mine
from somebody else.
If I'd had a full life rehearsal
I'd have made some changes to the text;
but I can't get away from my own words:
returning;
going away;
loving you.
But I wasn't good enough,
I couldn't write for days.
Living in evil times, I turned evil;
not seeing time passing,
I became imperceptible
as if trapped in clockwork
driven crazy by my own words.


The  translation of this poem was made by Lucy Rosenstein
and  Bernard O'Donoghue

Wednesday, December 31, 2014

घर

धन्य धरती है जिसकी करूणा अक्षत
धन्य  समुंदर जिसका नमक फीका नहीं होता
धन्य  आकाश  जो रहता हमेशा मेरे साथ हर जगह दिन रात
धन्य वे बीज जो पतझर को नहीं भूलते
धन्य वे शब्द भूलते नहीं  जो चौखट पर कभी बाट लगाते दुख  उसकी स्मृति को
धन्य उस विचार  पहिये पर टंकी छवियाँ
जो बन जाती टॉकीज़,
आकाशगंगा के छोर चुपचाप परिक्रमा में
धन्य यह सांस
मैं कैसे भूल सकता हूँ घर
और कोने पर धारे का पानी






* पहाडों में किसी-किसी स्थान पर पानी के स्रोत फूट जाते हैं। इनको ही धारे कहा जाता है।

 मोहन राणा
© 2014

Friday, November 07, 2014

कविता संग्रह - Poetry Collection

                       नया कविता संग्रह -  New Poetry Collection   

नया कविता  संग्रह  - मोहन राणा  /  New Poetry Collection  : Mohan Rana

Thursday, October 16, 2014

Swindon festival of Poetry : Mohan Rana Poetry reading : पार्क और शाम के समाचार और दुनिया की सबसे ऊँची छत





















4 अक्तूबर 2014 को  आर्ट सेंटर, स्विंडन में जो क्वैल के साथ कविता पाठ.
Reading poetry with Jo Quail at the event on 4th october 2014, Arts centre, Swindon.

लुइसा डेविसन की समीक्षा
Louisa Davison's chronicle of the event: Swindon festival of Poetry ;
Words and Cello
पार्क और शाम के समाचार और दुनिया की सबसे ऊँची छत
The Evening News and The Roof of the World 




Friday, October 03, 2014

Swindon Festival of Poetry



Swindon Festival of Poetry

The Evening News and the Roof of the World

 पार्क और शाम के समाचार और दुनिया की सबसे ऊँची छत

Poetry readings by Mohan Rana.
A special set of poems in Hindi ; a fusion rendition with Cellist Jo Quail.


4th October 2014, 6pm

Arts Centre, Devizes Road
Swindon SN1 4BJ




















Thursday, July 24, 2014

शहमात / Checkmate

शहमात

पलक झपकती है दोपहर के कोलाहल की शून्यता में,
एक अदृश्य सरक कर पास खड़ा हो जाता है
दमसाधे सेंध लगाता मेरी दुश्चिंताओं के गर्भगृह में,
कानों पर हाथ लगाए
मोहरों को घूरते
मैं उठकर खड़ा हो जाता हूँ प्यादे को बिसात पर बढ़ा कर
कहीं निकल पड़ने यहाँ से दूर,
टटोलते अपने भीतर कोई शब्द इस बाजी के लिए
दूर अपने आप से जिसका कोई नाम ना हो
शब्द जिसकी मात्रा कभी गलत नहीं
जिसका कोई दूसरा अर्थ ना हो कभी मेरे और तुम्हारे लिए
जिसमें ना उठे कभी हाँ ना का सवाल
खेलघड़ी में चाभी भरते ना बदलने पड़ें हमें नियम अपने सम्बधों के व्याकरण के,
लुढ़के हुए प्यादे पैदा करते हैं उम्मीद अपने लिए
बिसात पर हारी हुई बाजी में,
बचा रहे एक घर करुणा के लिए शहमात के बाद भी.

Translation of this Poem in English 'Checkmate'  http://visualverse.org/submissions/checkmate/