वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Monday, May 30, 2005

आता हुआ अतीत

आता हुआ अतीत,
भविष्य जिसे जीते हुए भी
अभी जानना बाकी है

दरवाजे के परे जिंदगी है,
और अटकल लगी है मन में कि
बाहर या भीतर
इस तरफ या उधर
यह बंद है या खुला !
किसे है प्रतीक्षा वहाँ मेरी
किसकी है प्रतीक्षा मुझे
अभी जानना बाकी है

एक कदम आगे
एक कदम छूटता है पीछे
सच ना चाबी है ना ही ताला


30 मई 2005 © मोहन राणा

Monday, May 23, 2005

छतरी

मैं छतरी ले कर निकला था पर शहर के पास पहुँच कर उसे कार में ही छोड़ दिया, यह सोच कर कि धूप है और बादल अभी दूर ही हैं.. पर यह भी बात मन में आई कि छतरी यहाँ तक साथ ले आया तो बारिश अब होगी ही. पर एक आवाज बोल पड़ी कोई बात नहीं रहने हो उसे.
काश छतरी साथ ले आता मैंने सुपरमार्केट से निकलते हुए सोचा, झड़ी लगी हुई थी, पर मैं रुका नहीं भीगते हुए चल पड़ा कुछ आगे जाकर एक दुकान की चौखट पर रुक गया, बस थोड़ी के लिए यह रुक जाय कार तक पहुँचने भर के लिए.. और जैसे उसने मेरी बात सुन ली वह कुछ रुक गई और मैं कुछ ही देर में कार तक पहुँच गया.
फिर वह चालू हो गई तेज हो गई, बौछारों में ओला वृष्टि भी आरंभ हो गई घर के सामने पहुँचते पहुँचते.
एक बार फिर छतरी हाथ में इस बार ओलों की बौछार को संभालती, बस पाँच कदम दरवाजे तक.

Sunday, May 22, 2005

रविवार

सुबह से बारिश हो रही है बीच में रुक गई थी पर अब उसकी झड़ी लगी है, सफेद रोशनी में घनी हरियाली
कुछ अजीब सी लग रही है जैसे वह कृत्रिम हो पर उसकी पुष्टि कैसे हो कोई तथ्य भी नहीं ..
20 तारीख को सालाना बाथ संगीत मेला शुरु हो गया, विक्टोरिया पार्क में हर साल की तरह भीड़ थी ,कुछ कम ,पर थी.
लोग अपने साथ छोटे शामियाने भी ले आए, दरियाँ बिछा कर खाने पीने में लगे थे पार्क के भीतर पुलिस और एम्बुलेंस की गाड़ियाँ भी एक ओर तैयार खड़ी थीं क्योंकि
बड़ी तदाद में नौजवान थे और पीने के बाद लड़ाई झगड़ा और मनमर्जी की हरकतें इधर कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं, टोनी ब्लेयर को आठ साल बाद अब जाकर होश आया है कि अंग्रेजी समाज की हालत क्या हो गई है और बिगड़ती जा रही है..
बहरहाल तो दस बजे तक बाथ फिलॉमॉनिक शास्त्रीय संगीत सुनाता रहा और फिर जिसका सबको इंतजार था.. दस मिनट की आतिशबाजी, धमाकों के साथ अँधियारा गीला आकाश रंग बिरंगे जलते फुहारों से चमक उठता, कभी तालियाँ कभी सामूहिक किलकारी भरा आश्चर्य.. और फिर एक वापसी अंधियारे कोलाहल की, वापसी में अँधरे में अपना रास्ता टटोलती लड़खड़ाती आवाजें टूटती अधूरे शब्दों में .. मोबाइल फोन पर बात करता कोई कहता "...हाँ यहाँ बहुत सारे लोग हैं.."
पुलिस की वैन में दो पुलिस वाले एक नौजवान को धकलते, आज उसकी रात थाने में ही बीतेगी, मैंने सोचा और यह भी देखा कई और भी वहाँ आसपास मँडरा रहे थे जैसे उनका भी मन हो पुलिस के साथ दो बात करने का ..

Wednesday, May 18, 2005

जो देखा भूलने से पहले

पाँच मिनट

पाँच मिनट हैं आधी रात होने में, और फिर और एक नया दिन. कल शाम नेहरू केंद्र लंदन में अशोक वाजपेयी का कविता पाठ सुनने गया... पर उस पर फिर कभी शायद.
बस अभी एक ब्लोग पढ़ा http://riverbendblog.blogspot.com/ और सोचता हूँ... क्या होने वाला है... दुनिया में

Monday, May 16, 2005

दोपहर

अच्छी धूप थी सुबह पर दोपहर होते बादल जमा हो गये, रुक गये तो बरसना ही था थोड़ी बारिश हुई अब एक सफेदी पूरे आकाश पर चढ़ी हुई है, बस रोशनी है ढलता हुई दिन है...कम से कम यह जलता हुआ प्यासा दिन तो नहीं है!


मैसेंजर पर कहानीकार तेजिंदर शर्मा से कविता के लुप्त होते पाठकों के कारण पर बात करने लगे..

Tejinder says:
दर असल हिन्दी कविता पाठक और श्रोता दोनों से दूर हो गई है
Tejinder says:
एक कारण ये भी है
Tejinder says:
पहले लोग कविता उद्दृत किया करते थे
Tejinder says:
अब फ़िल्मी गीत करते हैं
namaste says:
पर जो पुस्तक बेच रहे हैं बेचते रहेंगे
Tejinder says:
पुस्तक बिकती है लेकिन कितनी
namaste says:
वे हमेशा हरे भरे रहेंगे
Tejinder says:
और कितने लोग पढ़ते हैं
Tejinder says:
क्या प्रतिक्रिया मिलती है
Tejinder says:
ये क्ई सवाल हैं
namaste says:
कविता क्या केवल उद्धरण के लिए लिखी जाती है
Tejinder says:
देखिये हम जो भी लिखते हैं अगर वो केवल लेखक के लिए है
Tejinder says:
तो बहुत सीमित चीज़ है
Tejinder says:
कविता के लिए संवाद ज़रूरी है
Tejinder says:
आपकी बात पढ़ने वाले तक पहुंचनी ज़रूरी है
namaste says:
पर इस तरह के सवाल भारत में कोई किसी पेंटर से तो नहीं करता
namaste says:
ना ही किसी फूहड़ फिल्म बनाने वाले से
namaste says:
मध्य वर्ग को 25-50000 रुपए की
Tejinder says:
सर लेखक अपनी रचना लिख कर प्रकाशक के पास ले जाता है, ताकि लोग उसे पढें
namaste says:
अमूर्त पेंटिंग समझ आ जाती है
Tejinder says:
क्या इसके अतिरिक्त और कोई कारण है
Tejinder says:
अमूर्त पेंटिंग बना कर पेंटर टांग देता है
namaste says:
पर 150 रूपए का कविता संग्रह नहीं
Tejinder says:
अगर किसी को पसंद आगई ठीक नहीं तो टंगी है
Tejinder says:
मैं आपसे पूछता हूं यदि आपकी कविता मुझ से संवाद नहीं करती तो मैं उसपर दस रूपये भी क्यों खर्च करूं
Tejinder says:
कविता आपने अपने लिए लिखी है
Tejinder says:
मैं क्यों खरीदूं
namaste says:
कविता मैंने लिखी पर सोचा ही नहीं कि किस के लिए
Tejinder says:
फिर यह शिकायत क्यों कि कोई खरीदता नहीं
namaste says:
क्यों कि बेचना मेरा काम नहीं है
namaste says:
उसकी मुझे कोई शिकायत नहीं है
namaste says:
यह तो प्रकाशकों की शिकायत है
Tejinder says:
देखिये प्रकाशक व्यापारी है
Tejinder says:
वोह तो यह कहेगा ही
namaste says:
मैं तो हनारे समाज की सांस्कृतिक
namaste says:
हालात पर अपनी राय व्यक्त कर रहा हूँ
Tejinder says:
उस पर पहले हम ध्यान दें कि हिन्दी कौन सी पीढ़ी पढ़ सकती है
namaste says:
इग्लैंड में कविता के प्रेमी कम ही हैं
Tejinder says:
उस पीढ़ी को आपकी कविता समझ ना अये तो वो क्या करे
Tejinder says:
मैं नहीं जानता
Tejinder says:
इंगलैण्ड की कविता स्थिति को
namaste says:
यह समझ वाली बात तो मुझे खुद समझ नहीं आती
Tejinder says:
मोहन जी
Tejinder says:
जब लेखक अपने आप से बात करता है, तो पाठक को कैसे पता चले कि उसने क्या बात कब कर ली
namaste says:
मेरे कुछ ब्लोग भी छापें
Tejinder says:
भेजियेगा
namaste says:
कविता के साथ
Tejinder says:
यह एक नई ट्राई होगी
Tejinder says:
मैं इसके लिए तैयार हूं
namaste says:
कुछ नहीं बस मौसम और ज्यादातर बारिश के बारे में
namaste says:
http://wordwheel.blogspot.com/
Tejinder says:
ब्लॉग छापना एक नई परंपरा बनेगा
namaste says:

namaste says:
इरादा तो हमारा ऐसा ही है
Tejinder says:
अच्छा इरादा है
namaste says:

Tejinder says:
सर जी कल का प्रोग्राम कितने बजे है
namaste says:
देखिए आपने मुजे चुनौती दी है आज
namaste says:
कि नयी पीढ़ी कविता के नाम पर पैदल है
Tejinder says:
न भाई कोई चुनौती नहीं
namaste says:
उसे कुछ समझ नहीं
Tejinder says:
मैं यह नहीं कहता
namaste says:
कविता की
Tejinder says:
मैं यह कहता हूं कि नई पीढ़ी हिन्दी के मामले में पैदल है
Tejinder says:
उस पर कविता
namaste says:
अब लगता है उसमें जागृति लाने का समय आ गया
Tejinder says:
करेला और नीम चढ़ा
namaste says:
वे संवेदनशील हैं
namaste says:
पर कोई उन्हें इशारा कर दे
Tejinder says:
हो सकता है
namaste says:
पर देखिए कवियों की संगत खतरनाक होती है
Tejinder says:
सर जी दोनो बेटे आ गये
Tejinder says:
उनके लिए नाश्ता बनाना है
Tejinder says:
सर जी कल का प्रोग्राम कितने बजे है
namaste says:
अच्छा है आप कहानी लिखते हैं
Tejinder says:
होहोहोह
namaste says:
कविता तो जोगियों का रास्ता है
Tejinder says:
जी
namaste says:
नमस्ते कल मिलेंगे

सोमवार

पिछले हफ्ते के आंरभ में खराब मौसम और तेज हवा चलने की संभावना सुनी थी , हवा तो कुछ तेज थी और थोड़ी बारिश भी हुई पर सप्ताह के अंत में धूप अच्छी रही, रविवार को मैं बगीचे के एक कोने में जमीन की खुदाई करता रहा, हमारा विचार है कि उस जगह को समतल कर वहाँ एक लकड़ी का सायबान बनाएँगे.

शनिवार को माइकेल पेलिन ने शहर में हॉलबॉर्न संग्रहालय में एक नई इमारत का उदघाटन किया, हमें एक निमंत्रण आया तो मैं भी सपरिवार चला गया, मौसम अच्छा था एक तस्वीर भी माइकेल पेलिन के साथ हो गई उसने कहा
... ha a north pole smile ! (उसकी एक किताब का नाम है Pole to Pole ,1992) यूँ तो वह अभिनेता (मोंटी पाइथन ) के रूप में जाना जाता है पर इधर हाल के बरसों में बीबीसी ने उसे यायावर भी बना दिया!

अभी फिर कुछ धूप है, थोड़ी हवा भी, पेड़ कुछ सुस्ती के साथ हरियाली को झूला दे रहे हैं, सोमवार जो है आज !
16.5.05