वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Saturday, May 20, 2006

श्यामा






काली चिड़िया बोलती रहती है पेड़ की चोटी पर बैठी, आकाश बदलता रहता है अपना आवरण,