वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Sunday, November 29, 2015

नक़्शानवीस

The Cartographer, “As geography changes its borders, fear is my sole companion”.
                                                                  

पंक्तियों के बीच अनुपस्थित हो
तुम एक खामोश पहचान
जैसे भटकते बादलों में अनुपस्थित बारिश,
तुम अनुपस्थित हो जीवन के हर रिक्त स्थान में
समय के अंतराल में
इन आतंकित गलियों में,
मैं देखता नहीं किसी खिड़की की ओर
रुकता नहीं किसी दरवाजे़ के सामने,
देखता नहीं घड़ी को
सुनता नहीं किसी पुकार को,
बदलती हुई सीमाओं  के भूगोल में
मेरा भय ही मेरे साथ है


2010

The Cartographer

Between the lines it’s you,
absent, but a silent presence
just as the rain is absent in the passing clouds.
There you are, absent, in every empty space
of life. In every gap of time
on these panic-stricken roads.
I don’t look out any window,
I don’t stop at any door
I don’t watch the clock
I hear noone’s call.
As geography changes its borders,
fear is my sole companion. 


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 "Poems" by Mohan Rana
Translated from Hindi by Bernard O'Donoghue, Lucy Rosenstein (ISBN: 9780956057655)  2011
Poetry Translation Centre, London. 

The Cartographer, “As geography changes its borders, fear is my sole companion”.

The Cartographer heb gezegd:
“Wanneer de geografie haar grenzen wijzigt, is angst mijn enige metgezel”

© Mohan Rana
 

Tuesday, November 17, 2015

आएगा संदीपन यहाँ

 (संदीप राय चौधरी के लिए)



अपने दुखों के स्नायु तंतुओं को जोड़
मैं भरता पींग छूने मन की डालों के ओर छोर
जो आश्वस्त कर सके,
बीत जाएगा यह भी
विचलित धड़कनों में बल खाता दोपहर का अंतराल   


दुनिया के हर कोने जा लिख आए वहाँ तुम
पर इस बार मैंने लिखा
यहाँ आया था मैं निराखर अहेरी
खोये आकाश के दुपहरी साये
उठाए झोला भर जीवन टूटे शब्दों का,
लाल पत्थर के स्ट्रासबर्ग कथीड्रल की दीवार पर
गोया कभी पढ़ने यह आश्चर्य 

आएगा संदीपन यहाँ
मिट चुके लिखे भविष्य को फिर लिखने!



2014

© मोहन राणा